केंद्रीय बजट 2026-27: संपूर्ण विश्लेषण - आम आदमी, व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए क्या बदला?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ पेश किए गए इस बजट में सरकार ने टैक्स नियमों को सरल बनाने, डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने और मध्यम वर्ग को राहत देने की कोशिश की है।
यह बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ है। चाहे आप एक वेतनभोगी कर्मचारी हों, व्यापारी हों, या चार्टर्ड अकाउंटेंट, इस बजट में सबके लिए कुछ न कुछ महत्वपूर्ण है।
Account Hub आपके लिए लाया है इस बजट का सबसे विस्तृत और सरल विश्लेषण, ताकि आप अपनी वित्तीय योजना (Financial Planning) सही तरीके से बना सकें।
1. सबसे बड़ी खबर: नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 📜
इस बजट की सबसे क्रांतिकारी घोषणा यह है कि 6 दशक पुराने 'आयकर अधिनियम, 1961' को अब पूरी तरह बदला जा रहा है। सरकार ने इसकी समीक्षा पूरी कर ली है।
बड़ा बदलाव: 1 अप्रैल 2026 से देश में एक नया और बेहद सरल 'आयकर अधिनियम, 2025' (Income Tax Act, 2025) लागू होगा।
इसका क्या मतलब है?
सरकार का उद्देश्य टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को इतना सरल बनाना है कि एक आम नागरिक भी बिना किसी जटिलता के अपना रिटर्न भर सके। इसमें पुराने और बेकार हो चुके नियमों को हटाया जाएगा और डिजिटल अनुपालन (Digital Compliance) को बढ़ावा दिया जाएगा।
2. क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा? (Pocket Watch) 💰
आम जनता के लिए बजट का सबसे अहम हिस्सा यही होता है कि उनकी जेब पर क्या असर पड़ेगा। आइए विस्तार से जानते हैं:
✅ आम जनता को बड़ी राहत (सस्ता):
- विदेश यात्रा (Foreign Travel): विदेशी टूर पैकेज खरीदने पर लगने वाले TCS (Tax Collected at Source) की दर को 5% या 20% से घटाकर अब सीधा 2% कर दिया गया है। यह पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी है।
- पढ़ाई और इलाज: लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत अगर आप बच्चों की शिक्षा या किसी के इलाज के लिए विदेश पैसा भेजते हैं, तो उस पर भी TCS 5% से घटाकर 2% किया गया है।
- जीवन रक्षक दवाएं: कैंसर और कुछ दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए 3 जीवन रक्षक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह माफ (Nil) कर दी गई है, जिससे इलाज सस्ता होगा।
- निजी आयात (Personal Import): विदेश से व्यक्तिगत उपयोग (Personal Use) के लिए लाए गए सामान पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: माइक्रोवेव ओवन के पार्ट्स और सोलर ग्लास बनाने के कच्चे माल पर ड्यूटी खत्म की गई है, जिससे ये उत्पाद सस्ते हो सकते हैं।
❌ जेब पर बढ़ा बोझ (महंगा):
- शेयर बाजार ट्रेडिंग: वायदा और विकल्प (F&O) में ट्रेडिंग करने वालों के लिए बुरी खबर है। फ्यूचर्स (Futures) पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% और ऑप्शंस (Options) पर 0.1% से बढ़कर 0.15% हो गया है।
- छाते (Umbrellas): छातों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 20% या 60 रुपये प्रति पीस (जो भी अधिक हो) कर दी गई है।
- केमिकल्स: कुछ विशिष्ट रसायनों जैसे पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड पर ड्यूटी बढ़ाई गई है।
3. मध्यम वर्ग और 'Ease of Living' के लिए सौगात 🏠
सरकार ने मिडिल क्लास की रोजमर्रा की परेशानियों को कम करने के लिए कई प्रक्रियात्मक सुधार (Procedural Changes) किए हैं:
- MACT ब्याज टैक्स-फ्री: एक्सीडेंट क्लेम (MACT) के मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज को अब इनकम टैक्स से मुक्त रखा गया है और उस पर कोई TDS नहीं कटेगा। यह पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत है।
- रिवाइज्ड रिटर्न का समय बढ़ा: अगर आपसे ITR भरने में गलती हो जाती है, तो अब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक संशोधित (Revise) कर सकेंगे। इसके लिए मामूली फीस चुकानी होगी।
- विदेशी संपत्ति का खुलासा: छोटे करदाताओं (जैसे छात्र या पेशेवर जो विदेश गए थे) के लिए एकमुश्त 'विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना' (Foreign Asset Disclosure Scheme) लाई गई है। इसमें कम पेनल्टी देकर आप अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति की जानकारी दे सकते हैं और भविष्य की कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं।
4. निवेशकों और व्यापारियों के लिए (Market Updates) 📈
शेयर बाजार और कॉर्पोरेट जगत के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:
- शेयर बायबैक (Share Buyback) में बदलाव: अब तक कंपनियों द्वारा शेयर बायबैक पर कंपनी टैक्स देती थी। अब इसे शेयरधारक के हाथ में 'डिविडेंड' माना जाएगा और शेयरधारक को ही अपने स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा। हालांकि, शेयर की लागत को 'कैपिटल लॉस' माना जाएगा।
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): गोल्ड बॉन्ड पर कैपिटल गेन्स टैक्स की छूट अब केवल ओरिजिनल खरीदार (Original Subscriber) को मिलेगी, जिसने बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो। अगर आप बीच में सेकेंडरी मार्केट से खरीदते हैं, तो टैक्स देना होगा।
- डेटा सेंटर प्रोत्साहन: भारत में क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे दिया गया है।
5. अकाउंटिंग और टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए अपडेट 👨💻
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA), टैक्स प्रैक्टिशनर्स और अकाउंटेंट्स के लिए ये तकनीकी बदलाव जानना बेहद ज़रूरी है:
- पेनल्टी बनी 'फीस': ऑडिट रिपोर्ट, ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट या वित्तीय लेनदेन का विवरण (SFT) जमा करने में देरी अब 'पेनल्टी' नहीं बल्कि 'फीस' (Fee) मानी जाएगी। इसका मतलब है कि अब देरी होने पर लंबी कानूनी प्रक्रिया नहीं होगी, बस फीस भरकर काम हो जाएगा।
- क्रिप्टो पर पेनल्टी: क्रिप्टो-एसेट्स का स्टेटमेंट न देने पर 200 रुपये प्रतिदिन और गलत जानकारी देने पर 50,000 रुपये की पेनल्टी लगेगी।
- अभियोजन (Prosecution) में राहत: बुक्स ऑफ अकाउंट्स प्रस्तुत न कर पाना और 'Kind' (वस्तु) में भुगतान पर TDS जमा न कर पाने को अपराध की श्रेणी से बाहर (Decriminalize) कर दिया गया है।
- ICDS और IndAS का विलय: टैक्स अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स (ICDS) को अब IndAS में ही शामिल किया जाएगा, जिससे अलग से टैक्स बुक्स बनाने की जरूरत खत्म होगी।
- मैनपावर सप्लाई TDS: मैनपावर सप्लाई को अब स्पष्ट रूप से ठेकेदारी (Contract) माना गया है, जिस पर 1% (Individual/HUF) या 2% (Others) TDS लगेगा।
6. टैक्स दरें और स्लैब (Tax Rates & Slabs) 📊
🆕 इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव क्यों नहीं लिखा?
बजट भाषण के दस्तावेज़ में व्यक्तिगत इनकम टैक्स स्लैब (जैसे 0-3 लाख, 3-6 लाख आदि) में बदलाव की कोई विशिष्ट तालिका नहीं दी गई है। इसका मुख्य कारण यह है:
- नया एक्ट (2025): वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से 'नया आयकर अधिनियम, 2025' लागू होगा।
- अधिसूचना (Notification): इस नए एक्ट के तहत "सरल आयकर नियम" और फॉर्म जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे। संभवतः नए स्लैब और टैक्स की दरें इसी नई अधिसूचना के जरिए जारी की जाएंगी।
भले ही सामान्य स्लैब नहीं बदले, लेकिन कुछ विशिष्ट दरों में बड़े बदलाव हुए हैं:
| मद (Item) | पुरानी दर | नई दर (प्रस्तावित) |
|---|---|---|
| विदेशी टूर पैकेज (TCS) | 5% / 20% | 2% |
| शिक्षा/चिकित्सा (LRS) | 5% | 2% |
| तेंदू पत्ता बिक्री | 5% | 2% |
| स्क्रैप बिक्री | 1% | 2% |
| MAT (कंपनियों के लिए) | 15% | 14% |
| अघोषित आय (Cash Credit) | 60% | 30% |
7. अन्य महत्वपूर्ण बिंदु (Fine Print) 📝
- ब्लैक मनी एक्ट में छूट: 20 लाख रुपये से कम की विदेशी अचल संपत्ति (Non-immovable assets) का खुलासा न करने पर अब मुकदमा नहीं चलेगा। यह नियम 1 अक्टूबर 2024 से लागू माना जाएगा।
- डिफेंस पेंशन: सशस्त्र बलों की 'डिसेबिलिटी पेंशन' को पूरी तरह टैक्स फ्री किया गया है।
- सहकारी समितियां: पशु आहार (Cattle Feed) की आपूर्ति करने वाली सहकारी समितियों को टैक्स में कटौती का लाभ मिलेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
बजट 2026-27 भविष्य की नींव रखने वाला बजट है। जहाँ मिडिल क्लास को प्रक्रियात्मक राहत मिली है, वहीं शेयर बाजार के निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ा है। Account Hub का मानना है कि 'फीस आधारित अनुपालन' और नया इनकम टैक्स एक्ट व्यापार करना आसान बनाएगा।
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