आयकर विभाग (Income Tax) ने बिज़नेस पेमेंट के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिसे Section 43B(h) कहा जाता है।
इस नियम का सीधा असर आपकी बैलेंस शीट और टैक्स पेमेंट पर पड़ेगा। अगर आप किसी छोटे व्यापारी (Micro or Small Enterprise) से माल खरीदते हैं, तो आपको उन्हें समय पर पेमेंट करना अनिवार्य है।
Quick Summary:
🚨 नियम: MSME (Micro/Small) वेंडर को पेमेंट 15 या 45 दिनों के अंदर करना होगा।
❌ सज़ा: अगर पेमेंट लेट किया, तो वो खर्चा उस साल की इनकम में नहीं घटेगा (Disallowed), और आपको उस रकम पर भी टैक्स देना पड़ेगा।
1. समय सीमा (Time Limit) क्या है?
Section 15 of MSMED Act के अनुसार, आपको पेमेंट नीचे दिए गए समय में करना ही होगा:
- अगर कोई लिखित एग्रीमेंट नहीं है: तो माल मिलने के 15 दिनों के भीतर।
- अगर लिखित एग्रीमेंट है: तो एग्रीमेंट के मुताबिक, लेकिन किसी भी हाल में 45 दिनों से ज्यादा नहीं।
2. अगर पेमेंट समय पर नहीं किया तो? (Impact)
यहीं पर पेंच है! अगर आपने 31 मार्च तक पेमेंट नहीं किया (या समय सीमा निकल गई):
- खर्चा नहीं माना जाएगा: मान लीजिए आपने ₹5 लाख का माल खरीदा और पेमेंट लेट किया। इनकम टैक्स विभाग इसे आपका 'खर्चा' नहीं मानेगा।
- टैक्स बढ़ जाएगा: वो ₹5 लाख आपकी 'इनकम' में जुड़ जाएंगे और आपको उस पर 30% तक टैक्स देना पड़ सकता है।
- छूट कब मिलेगी? यह खर्चा आपको अगले साल (जिस साल आप असल में पेमेंट करेंगे) अलाउ होगा, लेकिन तब तक आपको कैश फ्लो का नुकसान हो चुका होगा।
3. यह नियम किस पर लागू है?
यह नियम सिर्फ तब लागू होता है जब आप माल इन लोगों से खरीदते हैं:
- Micro Enterprise: टर्नओवर ₹5 करोड़ तक।
- Small Enterprise: टर्नओवर ₹50 करोड़ तक।
- Note: यह नियम "Medium Enterprises" और "Traders" (जो सिर्फ ट्रेडिंग करते हैं, मैन्युफैक्चरिंग नहीं) पर लागू होने को लेकर अभी भी कुछ स्थितियाँ स्पष्ट की जा रही हैं, लेकिन सुरक्षा के लिए समय पर पेमेंट करना बेहतर है।
निष्कर्ष (Advice)
31 मार्च आने से पहले अपने सभी 'Sundry Creditors' की लिस्ट चेक करें। जो भी Micro/Small कैटेगरी में आते हैं और उनका पेमेंट 45 दिन से पेंडिंग है, उन्हें तुरंत क्लियर करें, वरना भारी टैक्स भरना पड़ सकता है।