TDS (Tax Deducted at Source) का मतलब है— कमाई के स्रोत पर ही टैक्स काट लेना।
सरकार कहती है कि अगर आप किसी को पेमेंट कर रहे हैं (जैसे सैलरी, कमीशन, रेंट), तो पूरा पैसा देने की बजाय उसमें से टैक्स का हिस्सा काट लें और सरकार को जमा कर दें। बाकी पैसा सामने वाले को दें।
एक अकाउंटेंट को ये सेक्शन्स हमेशा याद रहने चाहिए:
| Section | Nature of Payment | Limit (Salana) | Rate |
|---|---|---|---|
| 194C | Contractor (ठेकेदार) | ₹30k (Single) / ₹1L (Total) | 1% (Ind), 2% (Other) |
| 194H | Commission | ₹15,000 से ज्यादा | 5% |
| 194I | Rent (Land/Building) | ₹2,40,000 से ज्यादा | 10% |
| 194J | Professional Fees (CA, Lawyer) | ₹30,000 से ज्यादा | 10% |
| 192 | Salary | Basic Exemption Limit | Slab Rate |
टैक्स काटने के बाद उसे अपनी जेब में नहीं रखना है, उसे समय पर जमा करना होता है:
यह नियम आम आदमी के लिए बहुत जरूरी है। अगर आप कोई मकान या जमीन खरीद रहे हैं जिसकी कीमत ₹50 लाख से ज्यादा है:
TDS समय पर न काटने या जमा न करने पर भारी ब्याज (1.5% प्रति माह) लगता है। इसलिए ड्यू डेट्स का ध्यान रखें और सही सेक्शन के तहत ही चालान जमा करें।